बलिया में दुर्गा पूजा और दशहरा को लेकर DM ज्ञानेंद्र सिंह सख्त, नदियों में नहीं होगा मूर्ति विसर्जन!
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| नदियों में नहीं होगा मूर्ति विसर्जन! पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सख्त निर्देश। |
Ballia News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में शारदीय नवरात्र, दुर्गा पूजा और दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने अधिकारियों, रामलीला कमेटियों और दुर्गा पूजा समितियों के साथ बैठक कर त्योहारों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मूर्ति विसर्जन, पूजा पंडालों की सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, साफ-सफाई और पुलिस गश्त जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्देश दिए गए।
प्रशासन की ओर से सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों में करने के बजाय निर्धारित पोखरों और तालाबों में कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही पूजा पंडालों में आग से बचाव के उपाय अपनाने, बिजली के तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों, दुर्गा पूजा पंडालों और रामलीला स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
बलिया में दुर्गा पूजा और दशहरा की तैयारियों की समीक्षा
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित अधिकारियों और पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक का उद्देश्य नवरात्र और दशहरा के दौरान जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना था।
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा पंडालों, मंदिरों, रामलीला स्थलों और मूर्ति विसर्जन के लिए निर्धारित स्थानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि जहां भी किसी प्रकार की कमी दिखाई दे, उसे समय रहते दूर कराया जाए।
पूजा समितियों को भी प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करने की आवश्यकता बताई गई। त्योहारों के दौरान लोगों की भीड़, वाहनों की आवाजाही और देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों को देखते हुए पहले से तैयारी करना जरूरी है।
नदियों में नहीं होगा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन
बलिया में दुर्गा पूजा को लेकर जारी निर्देशों में मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों में करने के बजाय निर्धारित पोखरों और तालाबों में कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को विसर्जन स्थलों पर जरूरी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मूर्ति विसर्जन के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। यदि विसर्जन स्थल पर पर्याप्त पानी, रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं हो, तो दुर्घटना होने की आशंका बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विसर्जन स्थलों की व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर दिया है।
विसर्जन स्थलों पर किन व्यवस्थाओं की जरूरत होगी?
- निर्धारित पोखरों और तालाबों पर पर्याप्त पानी की व्यवस्था।
- विसर्जन स्थल और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना।
- शाम और रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था।
- श्रद्धालुओं के सुरक्षित आने-जाने के लिए उचित इंतजाम।
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए संबंधित अधिकारियों का समन्वय।
- स्थल पर मौजूद खतरनाक या फिसलन वाले हिस्सों की पहचान और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था।
श्रद्धालुओं और पूजा समितियों को चाहिए कि वे विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान का ही उपयोग करें। किसी भी नदी, घाट या अन्य स्थान पर अपनी ओर से विसर्जन की व्यवस्था करने के बजाय संबंधित प्रशासन से जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी लें।
पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर DM के सख्त निर्देश
दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। कई स्थानों पर सजावट, रोशनी, साउंड सिस्टम और विद्युत उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी स्थिति में बिजली से संबंधित लापरवाही या आग लगने की घटना गंभीर खतरा बन सकती है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसी भी पूजा पंडाल के ऊपर से बिजली के तार नहीं गुजरने चाहिए। इसके अलावा दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना बिजली के खंभों के पास नहीं करने को कहा गया है। इन निर्देशों का उद्देश्य विद्युत दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
पंडाल में आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम
प्रशासन ने पूजा पंडालों में अग्निशमन यंत्र रखने के साथ बालू से भरी बाल्टियां और पर्याप्त पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख पूजा पंडालों का अग्निशमन विभाग से सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा। इससे आग से बचाव की तैयारियों और उपलब्ध सुरक्षा साधनों की जांच की जा सकेगी।
- पंडाल में अग्निशमन यंत्र निर्धारित और आसानी से पहुंच योग्य स्थान पर रखें।
- बालू से भरी बाल्टियां और पानी की व्यवस्था रखें।
- बिजली के तारों, प्लग और कनेक्शन की सुरक्षा की जांच कराएं।
- बिजली के तारों पर अनधिकृत जोड़ या खुले तार न छोड़ें।
- पंडाल के प्रवेश और निकास मार्ग को बाधामुक्त रखें।
- आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने के लिए रास्ते स्पष्ट रखें।
- आग लगने पर भीड़ में अफरा-तफरी फैलाने के बजाय लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और अग्निशमन विभाग को सूचना देने की व्यवस्था रखें।
पूजा समितियों को चाहिए कि सजावट के दौरान ज्वलनशील सामग्री और बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी बरतें। किसी भी तकनीकी कमी को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर योग्य बिजली मिस्त्री की मदद लें।
रात में बढ़ेगी पुलिस की गश्त, सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
नवरात्र और दशहरा के दौरान पूजा पंडालों, रामलीला कार्यक्रमों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई धार्मिक आयोजन देर रात तक चलते हैं। इस स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
जिलाधिकारी ने पुलिस को रात में गश्त बढ़ाने और लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए। पूजा समितियों के सदस्यों से भी कहा गया कि वे रात के समय पंडालों पर मौजूद रहें और कम से कम एक सदस्य का मोबाइल नंबर संबंधित थानाध्यक्ष को उपलब्ध कराएं। इससे आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और समिति के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
पूजा समितियों को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
- समिति के जिम्मेदार सदस्यों के नाम और मोबाइल नंबर संबंधित थाने को उपलब्ध कराएं।
- रात में पंडाल की निगरानी के लिए जिम्मेदार लोगों की व्यवस्था करें।
- किसी संदिग्ध गतिविधि या विवाद की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें।
- भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें।
- कार्यक्रम स्थल पर अफवाह फैलाने वाले संदेशों की पुष्टि किए बिना उन्हें साझा न करें।
पुलिस और पूजा समितियों के बीच बेहतर तालमेल से त्योहारों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल सकती है। श्रद्धालुओं को भी किसी प्रकार की परेशानी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी देनी चाहिए।
DJ संचालकों को भी दी गई हिदायत
दुर्गा पूजा, प्रतिमा विसर्जन और दशहरा के दौरान कई स्थानों पर DJ और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन ने DJ संचालकों को अनावश्यक रूप से ऊंचाई बढ़ाने से बचने की हिदायत दी है।
कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम लगाते समय आसपास की बिजली लाइनों, सुरक्षित आवागमन और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा समितियों को चाहिए कि वे साउंड सिस्टम लगाने वाले लोगों के साथ पहले से समन्वय करें और संबंधित प्रशासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।
DJ या अन्य उपकरणों की स्थापना इस प्रकार की जानी चाहिए कि रास्ता अवरुद्ध न हो और श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी न हो। बिजली के तारों और उपकरणों को सुरक्षित ढंग से लगाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
मंदिरों और पूजा स्थलों पर साफ-सफाई के निर्देश
त्योहारों के दौरान धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिलाधिकारी ने नगर निकाय क्षेत्रों में स्थित मंदिरों और पूजा स्थलों पर सफाई, पर्याप्त प्रकाश और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पूजा स्थलों के आसपास कूड़ा जमा न होने देना, रास्तों को साफ रखना और रात में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। साफ-सुथरा वातावरण न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी है, बल्कि इससे धार्मिक आयोजनों को व्यवस्थित बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
नगर निकाय और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी
- मंदिरों और प्रमुख पूजा स्थलों के आसपास नियमित साफ-सफाई कराना।
- सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा जमा होने से रोकना।
- आवश्यक स्थानों पर प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
- पूजा स्थलों तक आने-जाने वाले रास्तों की स्थिति का निरीक्षण करना।
- श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करना।
आम लोगों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रद्धालुओं को कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालना चाहिए और पूजा स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
SDM और बिजली विभाग के अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDM) और विद्युत विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा पंडालों तथा विसर्जन स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयोजन से पहले आवश्यक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।
बिजली विभाग के लिए पंडालों के आसपास बिजली के तारों और विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों को विसर्जन स्थलों, सार्वजनिक रास्तों और पूजा स्थलों पर व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी होगी।
समय रहते कमियों की पहचान होने से संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और त्योहारों को सुचारु ढंग से संपन्न कराने में मदद मिल सकती है। पूजा समितियों को भी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पूरा सहयोग देना चाहिए।
बैठक में कौन-कौन अधिकारी रहे मौजूद?
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैठक में निम्न अधिकारी शामिल हुए:
- ADM अनिल कुमार
- पुलिस अधीक्षक डॉ. इराज राजा
- सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा
- जिले के सभी उपजिलाधिकारी (SDM)
- अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी
- रामलीला कमेटियों और दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधि
बैठक में संबंधित विभागों और पूजा समितियों के बीच समन्वय बनाकर त्योहारों की तैयारियां पूरी करने पर जोर दिया गया। प्रशासन का उद्देश्य है कि धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे।
बलिया में दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान श्रद्धालु क्या सावधानी बरतें?
त्योहारों को सुरक्षित बनाने में प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। दुर्गा पूजा पंडालों, मंदिरों, रामलीला स्थलों और विसर्जन कार्यक्रमों में जाने वाले लोगों को कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए।
1. निर्धारित विसर्जन स्थल पर ही जाएं
मूर्ति विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा तय किए गए पोखरों और तालाबों का ही इस्तेमाल करें। बच्चों को पानी के किनारे अकेला न छोड़ें और गहरे पानी में जाने से बचें।
2. भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बच्चों को अपने साथ रखें। छोटे बच्चों को अभिभावकों का मोबाइल नंबर बताना उपयोगी हो सकता है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सुरक्षित रास्ते से आने-जाने में सहायता दें।
3. बिजली के तारों से दूरी बनाए रखें
पंडालों में खुले तार, असुरक्षित कनेक्शन या बिजली से जुड़ी कोई समस्या दिखाई दे तो उसे स्वयं छूने के बजाय आयोजकों अथवा संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
4. आग लगने की स्थिति में सतर्क रहें
पंडाल में धुआं या आग दिखाई देने पर तुरंत जिम्मेदार लोगों को बताएं। सुरक्षित निकास मार्ग से बाहर निकलें और अग्निशमन विभाग को सूचना दें। भीड़ में धक्का-मुक्की करने से बचें।
5. अफवाहों पर भरोसा न करें
त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले किसी भी विवाद, दुर्घटना या सुरक्षा संबंधी संदेश की पुष्टि किए बिना उसे आगे न भेजें। सही जानकारी के लिए प्रशासन और पुलिस के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें।
6. स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखें
पूजा स्थलों और विसर्जन मार्गों पर कूड़ा न फैलाएं। यातायात में बाधा उत्पन्न न करें और पुलिस या प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
दुर्गा पूजा समितियों और प्रशासन के बीच समन्वय क्यों जरूरी?
धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने के लिए केवल पुलिस या प्रशासन की तैयारी पर्याप्त नहीं होती। पूजा समितियों, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है।
यदि पंडाल की सुरक्षा, बिजली की व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों और विसर्जन स्थल की तैयारियों की जानकारी पहले से साझा की जाए, तो कमियों को समय रहते दूर किया जा सकता है। समिति के जिम्मेदार सदस्य प्रशासन से संपर्क बनाए रखें और किसी भी समस्या की सूचना समय पर दें।
स्थानीय नागरिकों को भी आयोजन के दौरान सहयोगात्मक व्यवहार अपनाना चाहिए। धार्मिक कार्यक्रमों में आपसी सम्मान, धैर्य और जिम्मेदारी का परिचय देना जरूरी है। इससे बलिया में नवरात्र और दशहरा का माहौल शांतिपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बलिया में शांतिपूर्ण नवरात्र और दशहरा संपन्न कराना प्रशासन का लक्ष्य
जिला प्रशासन की तैयारियों का मुख्य उद्देश्य नवरात्र, दुर्गा पूजा और दशहरा के कार्यक्रमों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है। नदियों के बजाय निर्धारित तालाबों और पोखरों में मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था, पूजा पंडालों का सुरक्षा ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, रात में पुलिस गश्त और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, श्रद्धालुओं को विसर्जन स्थलों, कार्यक्रमों के समय, यातायात व्यवस्था और अन्य स्थानीय निर्देशों के संबंध में संबंधित प्रशासन से नवीनतम जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। किसी स्थान पर व्यवस्था या समय में बदलाव होने पर स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
प्रशासन, पूजा समितियों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से त्योहारों को सुरक्षित, स्वच्छ और शांतिपूर्ण बनाने में मदद मिल सकती है।
बलिया दुर्गा पूजा और दशहरा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: बलिया में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कहां किया जाएगा?
जिलाधिकारी के निर्देश के अनुसार दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों में करने के बजाय निर्धारित पोखरों और तालाबों में कराने की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के निर्धारित स्थल की जानकारी स्थानीय प्रशासन से प्राप्त करें।
प्रश्न 2: बलिया में दुर्गा पूजा को लेकर DM ने क्या निर्देश दिए?
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने मूर्ति विसर्जन, पूजा पंडालों की सुरक्षा, बिजली के तारों से बचाव, अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था, साफ-सफाई और पुलिस गश्त से संबंधित निर्देश दिए।
प्रश्न 3: क्या पूजा पंडालों में अग्निशमन यंत्र रखना जरूरी होगा?
बैठक में पूजा पंडालों में अग्निशमन यंत्र, बालू से भरी बाल्टियां और पर्याप्त पानी रखने के निर्देश दिए गए। प्रमुख पंडालों का अग्निशमन विभाग से सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा।
प्रश्न 4: पूजा पंडालों के ऊपर से बिजली के तार गुजरने पर क्या निर्देश हैं?
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसी भी पूजा पंडाल के ऊपर से बिजली के तार नहीं गुजरने चाहिए। मूर्तियों की स्थापना बिजली के खंभों के पास नहीं करने को भी कहा गया है।
प्रश्न 5: त्योहारों के दौरान पुलिस क्या व्यवस्था करेगी?
पुलिस को रात में गश्त बढ़ाने और सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। पूजा समितियों से भी जिम्मेदार सदस्यों के संपर्क नंबर संबंधित थानाध्यक्ष को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
प्रश्न 6: विसर्जन स्थल की जानकारी कहां से मिलेगी?
अपने क्षेत्र में निर्धारित विसर्जन स्थल और कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन, संबंधित थाने या पूजा समिति से संपर्क करें। बिना पुष्टि के किसी स्थान को अधिकृत विसर्जन स्थल न मानें।
प्रश्न 7: श्रद्धालुओं को पूजा पंडाल में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
श्रद्धालुओं को भीड़ में सावधानी बरतनी चाहिए, बच्चों को अपने साथ रखना चाहिए, बिजली के खुले तारों से दूर रहना चाहिए, कूड़ा नहीं फैलाना चाहिए और पुलिस तथा आयोजकों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है
बलिया में दुर्गा पूजा और दशहरा को सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। नदियों में मूर्ति विसर्जन के बजाय निर्धारित तालाबों का उपयोग, पंडालों में अग्निशमन उपकरण और रात में पुलिस गश्त जैसे कदम सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि मूर्ति विसर्जन के लिए निर्धारित तालाबों पर पर्याप्त व्यवस्था और सुरक्षा होनी चाहिए? पूजा पंडालों में सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए आपके क्या सुझाव हैं? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर लिखें।
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डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। विसर्जन स्थल, कार्यक्रम के समय और स्थानीय व्यवस्था से संबंधित अंतिम एवं नवीनतम जानकारी के लिए जिला प्रशासन के आधिकारिक निर्देशों की पुष्टि करें।

